वधती छायां में संझा री
देवदार अड़बम्ब खड़्या है,
अड़बंगी, ठठका, ठीमर
दळबादळ उमड़ पड़्या है।
परीगुफा में कुदरत आज
आपणौ सखरौ रूप धर आई
रळियायण अणपार रूप में
दुगमी सिखरां ऊपर छाई।