वधती छायां में संझा री

देवदार अड़बम्ब खड़्या है,

अड़बंगी, ठठका, ठीमर

दळबादळ उमड़ पड़्या है।

परीगुफा में कुदरत आज

आपणौ सखरौ रूप धर आई

रळियायण अणपार रूप में

दुगमी सिखरां ऊपर छाई।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : माओत्से तुङ्ग ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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