मिरतू जातरा

रेलगाडी री भांत

टेसण-टेसण पड़ाव

जंक्सन ठिकाणां

भाजता रूंख

छूटतो कडूम्बों

धूळ रा बादळ

विचारां री झड़ी

बणता बिगड़ता

निजर सूं दूर उड़ता

आस रा धोरा

जूण रा गेड़ा

पुळ-अंधड़-सुरंग

पण फेर भी आस

सांतरी आस

कै म्हारी जातरा होवैली पूरी

पूरो है म्हारो विसवास

जिनगाणी री छुक-छुक

म्हारी जूण चौपड़ी में

मांडैली आगै रो ठिकाणों

बो ठिकाणों

म्हारै विसवास रो।

स्रोत
  • पोथी : चौथो थार सप्तक ,
  • सिरजक : संजय पुरोहित ,
  • संपादक : ओम पुरोहित ‘कागद’ ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन
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