पीपळ गट्टो पीर है, के थारो भरतार।

रोटी गिटता पाण ही, हो घोड़ै असवार॥

हो घोड़ै असवार, पूंच कर ढ़ाळो गादी।

के गाडी है हूण, बता इब तो कुचमादी॥

बेची सारी टूम, जीमगो जुलमी सट्टो।

तरषै घर की नार, सरसतो पीपळ गट्टो॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : भगवतीप्रसाद चौधरी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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