राजा जी का ऊंचा बासा।

नत कै बाजै अड़बी-तासा॥

राजकंवर कै सैल-सकारां।

पटराणी कै चौपड़-पासा॥

चलम भरै सारा दरबारी।

परजा वारै फूल-पतासा॥

राजा जी मुळकै तो म्हांनै

कांटा लागै फूलां का सा॥

ये दुख-हरता, ये सुख-करता।

मेटै जनम जनम का सांसा॥

खरी चाकरी में हाजर छै।

नो कबीर-दस कुंभणदासा॥

अरज्यां अतनी, झेलै कतनी?

लांबा घणा राज का रासा॥

अब तो करम कर्‌यां घर संभलै।

जदी मलै रोट्यां का गासा॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शांति भारद्वाज 'राकेश' ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 22
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