लांछन

सरासर गळत है, कै

म्हैं खुदकुसी करी

पण हां, म्है कीं कर्‌यो जरूर

म्हैं म्हारै बाळां नै ऊपाड़’र

चढ़ा दिया

गोळ चक्कर माथै लाग्योड़ी

मूरती सामै

टाबर नै दे दी कलम

सांतरा आखर मांडण सारू

अर खुद रा गोडां नै जमा करा दिया

बैंक रा फिक्स, डिपोजिट में

म्हनै आशा ही कै

म्हारी मूरत रो उद्धघाटण होसी।

म्हारो बेटो लिखसी

म्हारो अभिनंदन-पत्र

बैंक सूं मिलसी म्हनै ब्याज

म्हारी चाल रो

व्यवस्था म्हैं खुद करी

इण रो म्हनै हक हो

कोई पीड़ा री बात नीं

म्हारी मूरती नै लोग

फींक नाखी गटर में

म्हारै लड़को हुयो नीं

बैंक रो दिवाळो निकळग्यो

म्हैं अब सावचेत हुयग्यो

अब में खुद नै सूंप दियो

अेक मण्डप सारू

जिण रा पाया मजबूत

अर कांगरा घणा चमकीला

जिण री खिड़क्यां माथै

भाटै रो कीं असर नीं

उण रै मांय

नीं कोई मूरत

फगत अेक सूनेड़

अर अेक अणसुण्यो सरणाटो

अब म्हैं ठीक हूं।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कृष्णगोपाल शर्मा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.)
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