मरु भागै खेजड़ी
मन भावै खेजड़ी।
छाया गैरम-गैर,
तन चावै खेजड़ी।
मरु ऊभी अेकली,
धन थानै खेजड़ी।
सांगरिया रो साग,
मन धापै खेजड़ी।
खोखा घणा मीठा,
तिस लागै खेजड़ी।
कैर-ढेलू बिच्चै,
रूप पावै खेजड़ी।
लूृंखड़ौ मन मोवणौ,
मन थापै खेजड़ी
हवन अर काठ मांय,
चंदन जोड़ै खेजड़ी।
छपनियै दुकाळ में
मिनख खावै खेजड़ी
अमरिता रो त्याग
जग जाणै खेजड़ी।
थारी सगळी बातां,
मिनख गावै खेजड़ी।
दरखत में दरखत,
राज रूंख खेजड़ी।