दुनियां रो है अजब वैवार, के पूछैलो भायला

ऊपर मीठो, भीतर खार, के पूछैलो भायला।

थांरै आगै थांरी सी बण ज्यावैली

म्हारै आगै म्हारी सी बण ज्यावैली।

मूंडै आगै करसी प्यार, के पूछैलो भायला

लारै सूं रोपै तलवार, के पूछैलो भायला।

आप भलांई रोजीना सैवै फजीहत

थांनै देसी बिन मांग्याई घणी नसीहत।

पर उपदेसां हरदम त्यार, के पूछैलो भायला

दनियां रा रूप हजार, के पूछैलो भायला।

गरज हुवै तो बाप गधै नै कह देवै

बिन मतलब आ-बैठ किणी नै नीं देवै।

हुवै सुवारथ सर मनवार, के पूछैलो भायला

ईं रो कोनी पायो पार, के पूछैलो भायला।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : किशोर कुमार निर्वाण ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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