रैईजै कोनी

कंई

कैईजै कोनी

डील

सूं

डील

मिलै—

मिनख

लुगाई

आरंपार आपोआप

काम करै

तौ

काम सरै।

काम वेग

पवित्र

रस मूळ

जो भोगै

सो

निहाल!

म्हारा

माईतां

थांरै

पगोपग

लगोलग

म्हूं

जोग साधूं

भोगवान

म्हूँ

भगवान

सूं

भगवती

कामाणु

नाचै

म्हारै रूं रूं में

रूप री रासलीला

रंगदार मेळ

रस-रसीजती धकापेल

म्हूं

प्रेमी आदमी

आदमण

प्रेमिका म्हारी

काम! काम!! काम!!!

स्रोत
  • पोथी : अपरंच (अंक-1) ,
  • सिरजक : ओंकर श्री ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : जुगत प्रकासण, मेहता भवन, कबूतरां रौ चौक, जोधपुर
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