जिंदगी में टेम

सै नै मिलै है

अपणै आप नै

बदलणै कै खातर

पण बदळै कोनी

चाचरै नै

ऊपर कर्‌यो राखै

कोई की सुणै कोनी

कोई क्यूं कहदे तो

पाछो भाटो सो बावै

जणा सोचै—

अल्लै! मै तो

क्यूं ही कोनी कर्‌यो

बीं बगत कनै टेम ही टेम

पसर्‌यो रह्वै

पण बीं बगत

जिंदगी कोनी रह्वै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बनवारीलाल अग्रवाल ‘स्नेही’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-44
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