म्हनै भली तरां याद है

थूं अर म्हैं

अेक दिन

अेक सड़क

अेक दिसा

अेक जातरा

साथै-साथै

ब्हीर होया हा!

सड़क थन्नै

म्हारो हाथ छोड़तांई

मनचीतै डूंगर पौंचायो!

डूंगर..

जठै फळ है, फूल है,

निरमल झरणा है!

सड़क

ठा नीं कद

पगडंडी में बदळगी

अर म्हनै

मरूथळ में ला तांढ्यो!

मरूथळ

जठै रेत है, भूख है, तिरस है

छणगारी मिरीचिका है!

सड़क

निस्चै अेक जादूगर है

अथवा जमूरो

अर इण रो जादू

निस्चै म्हारी पीढ़ी

कोनी जाण सकैला!

पण

थूं तो जाणतो व्हैला।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पुरुषोत्तम छंगाणी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
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