देस में म्हारै इतरो विकास है,

पइसो जितरो आदमी रै हाथ है।

जांच माथै जांच, जांच माथै जांच,

जांच मांय घोटाळो अठै आम है।

दवा दवा मांय राख बिकै खूब है,

बात री बात में घात ही घात है।

कागजां में बांध बण्यां अर टूटगा,

मंत्री-अफसर रै घरां भाई ठाठ है।

खेल अठै रिस्वत रो चालै गजब रो,

सड़क बणी कालै, टूटगी आज है।

टेण्डर कमीसन जनता कांईं जाणै,

रिस्वत रो बोनो जोरदार है।

आदमी री आतमा काट खागी है,

अंधारो घोर है, अंधारो रास है।

राज दिखावै सपना घणा ‘मीठा’,

लाड रो लाड अर लात री लात है।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मीठालाल खत्री ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-33
जुड़्योड़ा विसै