मरता-जींवता

लागै है तूं

जोस मांय है, होस मांय नी!

इण सूं

साच खातर, न्याव खातर

फांसी खावण नै त्यार है!

हुवैली कै– अै (होस वाळा लोग)

तनैं जोस दिखाय’र

फांसी चढ़वाय देवैला

अर

तूं मरजावैला

अेक अजाणी मौत!

अर

अै जींवता लोग

थारी मौत नै बदळ लेवैला

आपरी कीरत मांय!

जिण रो सेवरो बांध

जीवैला मजेदार जिनगाणी

हुय सकै कोई आवाज

विरोध करै, इण अन्याव रो

पण, तेरी तरियां

साच रा सीरी

होवण रै जुरम मांय

उणनै फांसी

देय दी जावैली

अर

घणकरा लोग इणरी तस्दीक करैला

अेक अजूबो कै–

तनैं फांसी देवणियां

जिणरा अै जींवता

विजयी लोग कदैई

विरोधी हा!

अर

तेरी बोलती आवाज नै

फांसी देवणिया अेक हुय जावैला?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बाबूलाल शर्मा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
जुड़्योड़ा विसै