वेलेंटाइन डे री भारत नै दरकार नहीं।
गौरा-गौरा गालां री गुलाल में ही राज है।
सात जलमा रा संग दुनिया में और कठै।
प्रीत रा प्रतीक अठै जौहर नै ताज है।
बारणा में मरदां रो आवणौ व्है खेंखारा सूं।
नारी रो जवाब टचकारी री आवाज है।
पायल री झंकार कठै सोळह सिणगार कठै।
दुनिया में और कठै घूंघटा री लाज है॥
मायतां रै पगै लागवा रै साथै दिन उगै।
शंख झालरां सूं गूंजै भारत री शाम है।
जिण री जोड़ नहीं हूवै कोई होड़ नहीं
सात सुरगां सूं यो रूपाळो हिन्दुस्तान है।
आमा सामा मिलतां ही लोग राम-राम कैवै।
रूंखड़ा नै देव मानै, भाटो भगवान है।
कीड़ी नै कसार देवै पंखेरू नै पाणी देवै।
इण कारण तो म्हारो भारत महान है॥
आंसूड़ा रा मोती झरै सासरै सिधावती रै
अस्या चितराम कठै और संसार है।
जागण-झड़ूल्या गोठ-मायरा री रीत कठै
सात फेरा और कठै सोळै संस्कार है॥
गाळ्यां रा भी गीत अठै राग फाग रीत अठै
दादी कहे टाबरा नै केणिया सजा’र है।
खीचड़ो तो प्रभु खात, सांवरियो लावै भात
भारत री हर बात संस्कृति रो सार है॥
जूनो प्रेम शकुन्तला-दुश्यन्त सुमिर लेवै
राधाजी रौ मन मोवै बांसुरी री तान है।
सत्त री सैनाणी में तो नारी निज सीस भेजै
मीरा रा तो प्रेमी सांगोपांग भगवान है॥
पपिहो तो पीव रटै, कुरजां संनेसो लावै
चांद रा दरस तो सुहागण्या री जान है।
नेह रो तो मेह झरै, प्रीत रा पनाळा पड़ै
प्यार रो अपार पारावार हिन्दुस्तान है॥
भूप राणां देस हित भाखरां रै मायं फिरै
धर्म दृढ़ सिक्ख वीर भीतड़ां में मरै है।
स्वामी हित पन्ना निज सुत समशीर सूंपै
टाबरियो बांध पीठ राणी जुद्ध करै है॥
अत्याचारी रो शरीर चीर भीम खून पीवै
रामजी राम नाम सूं तो भाटा नीर तरै है।
भारत रो कण-कण वीरता सूं जगोमग
भारत रो जन-जन साख ईं री भरै है॥