पूरब में पौ फाटण लागी

होवण वाळौ है परभात

हालौ, हाकौ कर नीं बेली

थां तौ झट कर लौ हल्लाण।

इण आभारंगी डूंगरियां नै

डाक, बधी कोनी जिन्दगाणी

दरसण आंरा कितरा रूड़ा

कठै मिळै इणरै परमाण।

इण ह्वेइछांग नगरी री

भींतां सूं सीधी सीस ऊँचाय

पसरी है परबत माळा

पूरब दरियै छाती चिपकाय।

अपणां सैनिक दखिण दिख

क्वाङ्गतुङ्ग माथै निजर जमाय

दूर जठै पसरी हरियाळी

सरस सुहांणी सोभा पाय।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : माओत्से तुङ्ग ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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