भूख!
भूख तौ हरेक भूंड़ी व्है
पण
पेट री भूख
सै सूं भूंडी।
इणरी जड़ा
इती ऊडी कै
जनम सूं ले’र
मरण तांई
आदमी करतौ रेवै
इणरौ जाबतौ,
पण भूख रौ रूंख तौ
नित हरौ
अर नित ही साबतौ।