हेत हरि रो नाम है
हेत ही चारों धाम।
हेत गयौ तो, के रह्यो,
रैग्यो खाली काम॥
खारो-खारो सुवाद है,
बिना जीव रो ग्यान॥
बीच भंवर में नाव ज्यूं
जीवण होग्यो आज।
रोटी अटकै गळा में,
पचै न कोई नाज॥
दया, धरम, सनमान री
कोनी रैगी कांण।
आपसी व्यौहार में,
खींच रिया सब बाण॥
दुनियां बदळगी ‘पूजा’
बदळ रिया सुर-ताळ।
तूं मत बदळज्यै पूजा,
हेत राखज्यै पाळ॥