बातां बात गई अै

सत री बातड़ली।

बेजो बणै सतजुग में बेटो

खोदी रातड़ली

लोभ नांव री लेय हाथ में

बाळण लाकड़ली।

सतरी गांठ, खोल हाथ सूं

खोटी बातड़ली

हाथ बळीता गांठ पलीतो

ल्यावै आगड़ली।

हाथां हाथ लगावै मिनख

पूळा बांथड़ली

थोड़ो तो सोनै में टांको

थोड़ी खोटी बातड़ली।

लोट लोभ में मांठा मिनख

बोदी बातड़ली

माळी मांठी मन करिया भी

आगी रातड़ली।

चेतन कर्‌यां भी चेतो खूयां

खू’सी बातड़ली

बातां बात गई अे हेली

सत री बातड़ली।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बी. एल. माली ‘अशान्त’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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