बम, लाठ्यां हथगोळा

अर बंदूकां

उग आई है म्हारै देश

अबै तो कठै कठै

लांचर अर छोटी तोपां री

खेती भी लुका-छिप्यां

होवण नै लागगी है।

इण फसल नै सींच रैया है

बै लोग

बेकसूर जनता रै खून सूं

जका इण देश रा

हेताळु नीं है

नीं है उण मांय

राष्ट्रीयत अर मिनखपणो

बै फकत हथियार उगावै

अर उण फसल नै

बांट देवै आप जिसा हाथां नै

जका हथियार

खावै-बजावै अर चलावै

बै इण धरती नै

बणावणो चावै रगत समुंदर।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : श्याम महर्षि ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 12
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