अेक आदमी थाणै आयो

सागै अेक समस्या ल्यायो

बोल्यो— “थाणैदार जी थे

अेक हथियार पकड़ो

म्है भोत परेसान हूं।

हथियार है तगड़ो।

स्कड है प्रक्षैपास्त भी है

तलवार है भालो भी है

खतरनाक अर कालो भी है।”

थाणैदार वर्दी लगाई, पिस्तौल घाल्यौ

आदमी सागै-सागै हथियार पकड़ण चाल्यौ।

आदमी री रसोई में जा कै देख्यौ

चूल्हो, तवो, परात डेकची

अेक गेलण तेल पड़्यो हो

बीं कै स्हारै बो खतनाक हथियार

बेलण खड़्यौ हो।

थाणैदार कही—“ईं हथियार नैं पकड़ कोनी सकूं

है मजबूरी

क्योंकै ईं रो लाईसेंस कोनी जरूरी।”

आदमी बोल्यो— “थाणैदार जी थारै सूं विनती है

मेरो भाग जगवावो

ईं हथियार नैं पकड़ कोनी सको

पण चुल्लै सूं निश्चित दूरी री

सांकळ तो लगवाओ

थाणैदार अपणो मुंडो खोल्यौ

भर्‌यै गळै सूं बोल्यौ‌—

‘टेम भोत माड़ो है, तनैं के बताऊं

तूं तो थाणै चल्यौ गयो

म्हैं कठे जाऊं?”

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : निरंजन सिंह निर्मल ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 23
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