झांझर बाजै छना-छन…

चूड़ियां खनकै खना-खन…

आज मचली जवानी रे आपणै देश में।

ठोकै बाजू अलबेला सतरंग भेष में॥

रिमझिम बरसै बरखा रानी इतरावै रे ताल।

किरण रूपाळी नाचै रे बूंदां स्सै दे-दे ताल॥

बिजळी कड़कै कड़ा-कड़…

बादळा गरजै गड़ा-गड़…

आज मचली जवानी रे आपणै देश में।

ठोकै बाजू अलबेला सतरंग भेष में॥

श्रम को भोपू रोज जगावै निकळै नई परोड़।

श्रम का गीत सुणावै जमके कल-पुर्जां की दौड़॥

मशीनां चालै घना-घन…

हथौड़ा चालै दना-दन…

आज मचली जवानी रे आपणै देश में।

ठोकै बाजू अलबेला सतरंग भेष में॥

हरी-भरी खेती लहरावै उफणावै खलिहान।

नाचै गेंती खुरपी नाचै गोरी संग किसान॥

ढोलक बाजै ठमा-ठम…

पायल बाजै छमा-छम…

आज मचली जवानी रे आपणै देश में।

ठोकै बाजू अलबेला सतरंग भेष में॥

सृजन और श्रृंगार की झांकी नवा-नवा निर्माण।

उन्नत की सोपान चढ़रैयो आपणो हिन्दुस्तान॥

पसीनो टपकै टपा-टप…

छप रैया छापा छपा-छप…

आज मचली जवानी रे आपणै देश में।

ठोकै बाजू अलबेला सतरंग भेष में॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : जगन्नाथ ‘विश्व’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
जुड़्योड़ा विसै