गुणीजनां री सोबत चोखी

गुणीजनां रो संग

गुणीजनां री बातां चोखी

सुणवा वाळा दंग

गुणीजनां रै अेड़ै-नेड़ै

देवगुणां रो वास

गुणीजन गुलमोहर ज्यूं लागै

गुणीजन अमलतास

गुणीजनां नै कम मत आंको

गुणीजन जग री आस

गुणीजन जायां कींयां रैसी

मिनखां पै विसवास

गुणीजनां रा म्हे आभारी

आभारी भगवान

सैंग आपनै धिन-धिन जाणी

गुणीजन थांरी खान

गुणीजन कठै बंध्योड़ा कोनी

फिरै ठाम सूं ठाम

गुणीजन जग रा हेताळू है

अेक ठौड़ कांईं काम

गुणीजन मिनखपणै रा चाकर

गुणीजन सेवक दास

गुणीजना री खातर बाकी

सूरज में गरमास।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : कुन्दन माली ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
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