घणो अंधेरो अेक रात में

कुरळाती चीख निकळी।

अरे बचाओ! अरे बचाओ

राम-राम म्हूं बळी-बळी।

आधी रात पाड़ोसी जागा

नर नै नार, गळी सगळी

समसाणां में रोज बळै

अबकै घर में अरथी प्रजळी।

सास-ससुर सै बिलख रह्या हा

गजब कर दियो थैं बेटी।

घास तेल ढुळियोड़ो ऊपर

पाड़ै तुलियां री पेटी।

घर वाळों नै धीरज दीनी

मिनख बास रा भेळा होय।

धीर धराता सैणा बोल्या

होणो हुवै सूं टळै कोय।

घर लिछमी किंयां रूसाणी?

कर लिनो क्यूं आतम घात?

इसड़ो कांई दुख हो उणरै?

भला हुई ही कांईं बात?

परण्यां नै तो दोय बरस

पूरा हुआ नहीं हा हाल।

क्यूं इतरो दुख उणनै उपज्यो

होया कीकर इसा हवाल?

घर रा मांझी बोल्या, म्हे तो

जीवां हां, पण मुंआ समान।

आतम-दाह कियो बिन कारण

मिट्टी मिलगी घर री आन।

स्नान-क्रिया करवातां उणरै

गाबड़ माथै निजर पड़ी।

टूंपो दीनो, समझ बासरा

जावण लागा उणी घड़ी।

हाय! हाय! थे खोटो कीनो

टूंपो दीनो परलख आज।

थे पापी हो, थांरै कारण

तजखाणो है सैंग समाज।

पुलिस बुलावां, केस चलावां

कीनो इसड़ो खोटो काम।

भूख दायजा री भख लीनी

नगरी सगळी कर बदनाम।

मिनख नहीं हो, थे राखस हो

मिनख-मार, हत्यारा हो।

लोभ लालचां सूं बंधियोड़ा

थे पापां रा भारा हो।

राम निकळियोड़ा, समाज में

मिनख-मारणो है कांईं खेल?

थांरी ठौड़ घरां में कोनी

थांरी असल ठौड़ है जेळ।

उण अबला री आरत आत्मा

कोस रही है जन-जन नैं।

इसड़ी हत्यावां बैनों री

कळपावै है जन-जन नैं।

मात-पिता रै सारू बेटी जणणों

आज बड़ो अभिसाप।

बेटी व्हैणो समझै सगळा

पूरव-भव रो मोटो पाप।

सोनो-चांदी-नांणा-गैणा

कपड़ा-फ्रिज स्कूटर लाव।

जद जा नै बेटी परणीजै

नैं बेटी हीरां रै भाव।

तो भूख नहीं भागै है।

लाख-लाख री लागै लाय।

बाप नहीं दे सकै बापड़ो

बेटी बिस्तर में बळ जाय।

बचपन में कन्या विक्रय

व्हैतो हो, कीनी ही कविता।

आज होय रह्यो वर विक्रय

उल्टी बैवै है सरिता।

वर विक्रय कै कन्या विक्रय

दोनूं है भारी भूल।

नर-नारी दोनूं दुख पावै

जन-समाज रै अै प्रतिकूल।

जीवण-सरिता री मीठास पै।

ब्याव हुवै जे मन रा मैल।

नांणै री वद-घट सूं नापै

तो वो जीवण लागै जेळ।

देज-लेज बधतो जावैला

तो बधती जावैला लाय।

बळती जासी बैन-बेटियां

जीवण दुखी, दुखी समुदाय।

नवै जमाना रा जवान थे

पछै नारियां क्यूं बाळो?

नैन नैनमल थांरा खोलो

मूंडा रो खोलो ताळो।

सुणो जवानां सुणौ बेटियां

अबै मिटाणौ है अन्याव।

लेज-देज जिस घर में हुवै

बठै मती करजो थे ब्याव।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : नैनमल जैन ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
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