आव ईसका!

जे कीं म्हारो है जीवण में, वो गमै नहीं,

कोई खोस नीं ले जावै,

म्हैं करूं रखवाळी, थारै साथै ईसका

कैड़ो ओपरो

कैड़ो स्वारथी लागौ म्हारो बरताव

म्हारी चिरमियां, म्हारा गड्डा-कंचा,

म्हारो बरतो, म्हारी पाटी,

घणी प्यारी है

थारै कारण रखाव है, म्हारा ईसका

थूं रसायण है

प्रेम, घ्रिणा, दुख अर डर रो

थारै आयां म्हैं सम्हाळूं म्हारी सिरड़

म्हारी रीस, म्हारी बांण कुबांण,

म्हारी चिड़

म्हारी प्रीत कोई क्यूं ले जावै

आव ईसका, म्हैं राखूं फगत म्हारै तांई

भगवांन रो दूजो नांम ईसको

इण कारण बाइबल बतावै—

कोई दूजा देव नै मत धोको,

सगळा धरमां नै छोड़

जावो म्हारी अेकली सरण में

घणो प्रिय है थूं ईसका

आव ईसका।

स्रोत
  • पोथी : निजराणो ,
  • सिरजक : सत्य प्रकाश जोशी ,
  • संपादक : चेतन स्वामी ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
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