अेक दिन बाई
सांगरियां अर कांदां रो साग बणायो
अर लूण चाख्यो तो
साव फीको लाग्यो!
थोड़ो फेर न्हाख्यो
अर चाख्यो
तो भी लूण फीको ई लाग्यो
बाई झट लूण सूं पूछ्यो–
थारै मांयलो खार
गयो कठै परो रे?
लूण बोल्यो
मिनखां में!