बखत आयग्यो भाई! भाई!

धूतां री तिणसूं बण आई॥

खाय कमावण आसंग तूटी,

बण बाबोजी धुणी रमाई॥

भगमो वानो काळा चसमा,

बैठ मठां मे करै कमाई॥

चोर मुलक रा होता चावा,

बणग्या बापू कोई सांई॥

फगडाळां रै चाळां चमक्यो

बैठो अळगो जाय गोसांई॥

मीठै गलवै गावै रागां,

भोळां नै भरमावै भाई॥

मुळ मुळ चादर चमकै चैरा,

ऊपर निरमळ मांय कसाई॥

चौड़ै धाड़ै ग्यान बगारै

निज रा काळा काम लुकाई॥

त्याग-त्याग री राग अलापै,

भेट पूज सूं करै कमाई॥

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी ,
  • सिरजक : गिरधरदान रतनू दासोड़ी
जुड़्योड़ा विसै