गजब जचै छै सणगार, गांव की छोरी पै
जाणै खिलरी छै कचनार, गांव की गोरी पै।
रूप को नखार देख, चन्दो भी सरमावै,
अर मिसरी-सी मीठी वा लागै बात-बात में,
सुआ जसी नाक अर बाळ घटा घणघौर,
चूड़ो हाथी दांत को भर्यो छै पूरा हाथ में,
जाणै परी नै लियो औतार, गांव की गोरी पै।
जाणै खिलरी छै कचनार, गांव की गोरी पै।
बिजळी चमक उठै, चूंपा की चमक सूं,
जाणै सूना सूं जड़ाई राखी दोन्यूं सामै दांत में,
नांव घणौ लागै छै रूपाळो लीली स्याई सूं,
भाईली की लारां गुद्यौ, फूल्या-फूल्या हाथ में,
पुसबां की करद्यां बौछार, गांव की गोरी पै।
जाणै खिलरी छै कचनार, गांव की गोरी पै।
पायलां की झणकार, गांव राग मलहार,
घघरा की लावणां ठुकरावै जद पांव सूं,
धरती को कण-कण, धन-धन हो जावै,
जद धूळ छंट जावै, गोरा गोरा पांव सूं,
घणा कवि बण जावै यार, गांव की गोरी पै।
जाणै खिलरी छै कचनार, गांव की गोरी पै।
राती कळी जाणै छोरा भंवरा ज्यूं भंर्रावै छै,
मंद-मंद हांस कर बात कान-कान में,
जीं पै बाद्यै तरछी नजर सूं कटार बस,
उई मर जावै ऊं पै अेक मुस्कान में,
पण रह जावै मन मार, गांव की गोरी पै।
जाणै खिलरी छै कचनार, गांव की गोरी पै।
कोई सूं सगोस करै, कोई दलकार द्यै,
कोई सूं मसकर्यां करै बड़ा चाव सूं,
कोई खावै ठोकर पड़ै कोई चक्कर सूं,
जाण घूमै छै धरा ऊंका हाव-भाव सूं,
कोई कट कचकची खार, गांव की गोरी पै।
जाणै खिलरी छै कचनार, गांव की गोरी पै।