इन्सानियत, ईमानदारी-अर भाईचारो

ना रैयो थांरो ना रैयो म्हांरो,

ईं बातां पर सगळा भाई भेळा हुय’र

खुलै दिमाग सूं विचारो

बाळू री भींत अर थोथी प्रीत

किताक दिन चालसी?

अणूंती बातां आपां री आंपानै ही

फोड़ा घालसी

पैली लोग बड़ै छोटै रो कायदो राखता

पण आज सागी बाप नै को धारै नीं

जकै रै हियै में थोड़ो सो ही प्रेम हुसी

बो तो कीड़ी नै ही को मारै नी

क्यूं अेक दूजै नै दोस देवां

खुद रै ही काळजै में झांक’र देख लेवां

तो सगळो भरम मिट जासी

आण वाळी पीढ़ी सुख पासी।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : गौरीशंकर 'मधुकर' ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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