हाकौ थमगौ है।
म्हैं रंगमंच माथै आयगौ हूं।
बारणै रै चोखटै माथै झुक’र
म्हैं आधी दूर सूं आवती आवाज में
आ सुणण री कोसीस करूं हूं
के जीवण में कांई-कांई बीतैला!
हजारूं ऑपेरा-झरणा सूं रात रौ
सरबग्रासी अंधारौ म्हारै ऊपर जम रैयौ है।
दादोसा, बापू, जे औ व्हेय सकै तौ
औ प्यालौ म्हारै सांम्ही सूं हटाय लौ।
थांरौ औ कठोर नाटक म्हनै रुचै है
अर म्हैं औ सांग करतौ ई राजी हूं।
पण औ दूजौ नाटक सरू व्हैय रैयौ है
इणमें म्हनै म्हारी इंछा सूं करण दौ।
द्रस्यां रौ क्रम तै होय चुकौ है
अर मारग रौ अंत ई तैसुदा है।
म्हैं अेकलौ हूं, सरबस डूबतौ जाय रैयौ है।
जिंदगाणी में चालणौ, मैदान में चालणौ नीं है।