गांधी शताब्दी रो वर्ष, जिकै में दिवाळी रो त्योहार,

गांधी रै देश में, घणी घणी खुशियां

आनंद होवणो जोईजै,

पण लोग तो दीवाळी नै जाणै,

परपंरा सूं मनाता आया

गांधी रो नाम सुण्यो हो, काम री परंपरा घाली कोनी

जणै जनता जाणै किंयां?

बठीनै नेता पाणी रै दांई, पईसा बैवावै है

गांधी शताब्दी रै नांव ऊपर!

हेल-मेल अर प्रेम राखो, उपदेश देवै

‘हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई’

केवल जबाना सूं!

काम करै, कैं सूं छानो रैयो

पार्टी रा बडोड़ा लोग आपस में फूल बरसावै

जूतम जूतांरा!

देख-देख दंग होग्या, बादशाह खान!

अतिथि बुलाय’र न्यारा न्यारा होणै री

खुरसियां री बांट करणै री पंचायत भोळाई!

फसग्या गांधी शताब्दी रै कोड में,

चौबोजी छबोजी होवणनै गया

पण आया दुबोजी होर

गांधी शताब्दी रै वर्ष में, दीवाळी रो त्योहार

देश में परम्परा घालै

नेता लोग, जुदा होणै री

लड़ाई करणै री!

अबै सदा ही याद रैसी, गांधी शताब्दी रो वर्ष

जिकै में दीवाळी रो त्योहार

सरकार बड़ी कै संगठन?

ईं रो फैसलो करैला

गांधी शताब्दी रो वर्ष

जिकै में दीवाळी रो त्योहार!

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : भंवरलाल छलानी ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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