कूँपळ का उठाण कै सागै
दीखै छै
फसल कै चोखी होबा की तोल
औंसण।
पण कदी-कदी
आंख्यां अगेडी बी
चरज्याँ छै खेत कै तांई
खेत की मेड़।
पैला बसूँ मनख
समजै ई कोई न्हं
बिधी का बिधाण
कै कपट री धरा पै
न्हं फळै
पाप की फसल।