अबकै असी दिवाळी हो

भरी अन्न सूं थाळी हो।

रोट्यां बिन कोई ना तरसै

हरख-बादळी आंगण बरसै

झूंपड़ियां अर टापरियां में

सजी-धजी घरवाळी हो

अबकै असी दिवाळी हो

भरी अन्न सूं थाळी हो।

शिक्षा रा बादळिया बरस्या

पण म्हे रोजगार नै तरस्या

मिलै नौकरी अर रोजी तो

घरां नार-नखराळी हो

अबकै असी दिवाळी हो

भरी अन्न सूं थाळी हो।

मायड़ जग-जीवन रो सार

बेट्यां लछ्म्यां रो औतार

कूंख में पळती लछ्म्यां री

अब तो रूखाळी हो

अबकै असी दिवाळी हो

भरी अन्न सूं थाळी हो।

आतंकी साया सूं जग में

एक रात ना काळी हो

आखा जग में सूरज री

किरण-किरण उजियाळी हो

अबकै असी दिवाळी हो

भरी अन्न सूं थाळी हो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : लीला मोदी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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