सैचनण सूरज बाप री साख सूं

साची केवूं—

मैं बैठ्यो हूँ धरती रै सिरै अन्धकार में।

म्हारै नजीक

जुगनू री गळाई अेक जगबुझ उजास

फकत थूं है थूं।

थारी अेक सूं दूजी पळक रै बिचाळै

म्हारी उमर रा लांबा अंधारपख सिसकै।

थारै अलोप हुयां

मैं फक उजास में जोवूंला बाट

थारै अेक अंधारै

थारै अेक ऊजळै चानणपख री

बांचूला हरिया-भरिया दरख़्तां नै—

बाबोजी रो गेडियो।

स्रोत
  • पोथी : उतर्‌यो है आभो ,
  • सिरजक : मालचन्द तिवाड़ी ,
  • प्रकाशक : कल्पना प्रकाशन, बीकानेर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
जुड़्योड़ा विसै