धरती।
तूं कदै’ई करती
सिणगार
बेसुमार।
कूमटै
खैजड़ी
बोरटी ऊपर होंवता
हरिया काच्चा पत्ता
जाणै कचनार।
थारी निजरां सामीं
होयो है अनाचार
बता
कुण राखस री बकरी
चरगी
थारो हरियल संसार?