धरती।

तूं कदै’ई करती

सिणगार

बेसुमार।

कूमटै

खैजड़ी

बोरटी ऊपर होंवता

हरिया काच्चा पत्ता

जाणै कचनार।

थारी निजरां सामीं

होयो है अनाचार

बता

कुण राखस री बकरी

चरगी

थारो हरियल संसार?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ओम पुरोहित ‘कागद’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
जुड़्योड़ा विसै