कांई हुयो मां, जे दुरदिन में हुय रैयौ है, भाग म्हारौ अस्त!
समाप्त इतिहास म्हारै जीवण री पीड़ रौ,
जीवण-चक्र रौ काळ इत्तौ छोटौ!
मां, थारै अंतर में उठैला पीड़ री हूक!
रो मत मां! म्हारै वास्तै दुखी मती व्है !
सांती सूं मिरतु रौ करूं हूं वरण,
वरण गौरवपूरण काळ रौ!
इणसूं पैली के म्हारी जीवण-वीणा हुय जावै सांत
थारै सारू उण माथै अेक स्वर छेड़ दूं।
मिरतु गीत रौ स्वर,
अेक अैड़ौ स्वर जिकौ कर देवैला पीड़ री आह नै मंदी,
ठीक विसी इज पवित्र, निस्कळंक,
विस्वासू अर भावमयी पीड़ा
जैड़ी के थनै म्हारै जलम री बगत हुई ही मां!
अर अबै पाछौ औ बगत है!
हे प्रभु! बगस दै म्हारा पाप, अभय दै!
मां विदा दै!
यात्रा रौ बगत हुयगौ है।