सोच री बाथां में

देखूं म्हैं

म्हारै देवता नै

उणरै भोळापै नै

अर आंख्यां मांय

बणती अेक कहाणी नै।

स्रोत
  • पोथी : मंडाण ,
  • सिरजक : सतीश छिम्पा ,
  • संपादक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham
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