कूँपळ का उठाण कै सागै

दीखै छै

फसल कै चोखी होबा की तोल

औंसण।

पण कदी-कदी

आंख्यां अगेडी बी

चरज्याँ छै खेत कै तांई

खेत की मेड़।

पैला बसूँ मनख

समजै कोई न्हं

बिधी का बिधाण

कै कपट री धरा पै

न्हं फळै

पाप की फसल।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ओम नागर ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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