अचाणचकै कठै सूं

बोली कोयल!

कै तो बैठी ही

मून होय'र...

आसाढ रो ऊमड़ियो

पै'लोड़ो बादळ

उणरी

पै'लपोत री छांट्यां

इणनै घणी लागी रळियावणी।

उतरियो सांचै हैज

उणरै

कोडीलै सुरां।

स्रोत
  • पोथी : अंतस दीठ ,
  • सिरजक : रचना शेखावत ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन,जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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