चांदौ ढळतौ जाय साथण्यां चांदौ ढळतौ जाय

मन म्हारौ मुरझाय साथण्यां चांदौ ढळतौ जाय

रै हिवड़ा में रैगी पिया मिलण री आस

भटक्यौ रैण-बावळौ भूलांणौ रैवास

विरहण चकवी प्रेम खजांनौ किण साजन परखाय

चांदौ ढळतौ जाय साथण्यां चांदौ ढळतौ जाय

चकोरी थारै मन री जांणूं हिवड़ै घाल्यौ हाथ

प्रेम गांव थूं कदै ज्याज्यै कहद्यूं साची बात

प्रेम बावळी बणी चकोरी पल-पल बळती जाय

चांदौ ढळतौ जाय साथण्यां चांदौ ढळतौ जाय

हिरण्यां हंसती देख साथण्यां किरत्यां मदमाती

भोळा भंवरां री याद हरी व्है निरखंतां रंगराती

हिरण्यां किरत्यां दोनूं भोळी बातां में बिलमाय

चांदौ ढळतौ जाय साथण्यां चांदौ ढळतौ जाय

मनमेळू भुरजाळा बादळ जद आडा फिर ज्यावै

चांदा रै मारगियै भारी धूंधळ छा ज्यावै

अड़वड़तौ आखड़तौ चांदौ कीकर आगै आय

चांदौ ढळतौ जाय साथण्यां चांदौ ढळतौ जाय

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : लक्ष्मणसिंघ रसवंत ,
  • संपादक : तेजसिंह जोधा ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाश ,
  • संस्करण : जुलाई 1981
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