तपतो तावड़ो

काळजो हलकै

जीभ काढ़्यां सिसकै कुत्तियै रो जीव

टाबरिया खोलै अैन उघाड़ा

पावडर ज्यूं चमकै, टीबड़ै री रेत

लेरै बैठी मावां जूं काढ़ै

घाघरियै री, सिर री

फेर वांनै मारै टच-टच

बाजरै री रोटी, ऊपर मिरच्यां रा बीज

रगड़’र ल्याया, लूण घाल्यो सागै

ढूंढ़ता फिरै, कठैई प्याजियो है कांई?

बारै खूंसड़ा बाज्या, आयो घर रो आदमी

डील उघाड़ो पोतियो माथै

लीरा लटकै, नीचै धोती गोडां तांई

ऊपर आभो, नीचै धरती

सिसकारो मार’र बोल्यो

बिरखा कोनी बरसै भगवान।

जुआं मारती लुगाई बोली

दाणा निवड़ग्या

इत्तै नै अेक जुआन आयो, पेंट पैर्‌यां

पट्टा बायां मूंछा माथै

फिर्‌योड़ो पाछणो, हंस’र सुणाई बात

चांद पर मिनख उतरै

लुगाई जूं मारै

आदमी देखै बादळी कानी

टाबर उघाड़ा खेलै

चांद पर मिनख उतरै।

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : करणीदान बारहठ ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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