फैला दे थूं अंधारौ सगळै,
म्हैं दियौ नुंवौ जळा द्यूंगो।
आंधी, तूफां अर सुनामी
आता-जाता रैवै है।
सुख-दुख दो पहलू है
ग्यानी-ध्यानी कैवै है।
कतरौ ही उण्डौ व्है सागर,
म्हैं सेतु वठै बणा द्यूंगो।
शीळ बणग्यौ है बौपारी
दरद बेच रैयो हाट में।
नदियां रो पाणी खुटग्यो
बणै पणघट किण घाट में॥
रेतीला टीबा थूं फैलादे,
नखलिस्तान बणा द्यूंगो।
ओ बैरागी वाळौ डेरौ
बेवता पाणी ज्यूं जीवण
अठै कुण थम पायौ है
उजड़्या है वन-उपवन॥
सो संसार मिटा द्यो थे,
म्हैं स्रिष्टि फेरूं रचा द्यूंगो।
फैला दे थूं अंधारौ सगळै,
म्हैं दियो नुंवौ जळा द्यूंगो।