ठैरियोड़ै जळ में
भंवाय'नै भाटा मारै
प्रेम रै रिस्तां बिचाळै
दीवारां चुणवाय दै
पराई पंचायती री फोड़ी रा
थारी-म्हारी री बीमारी फैला’र
घणा घर तोड़ै...