बीकानेर, बांसवाड़ो, चूरू, चित्तौड़गढ, अलवर, अजमेर

नागौर चित आयो है।

राजस्थानी भासा अेक बोली है अनेक भांत, आन बान, शान

खूब रंग रूप लायो है।

चिकित्सक रूप ‘शिव’ संवेदनशील होय, सेवा में रत,

स्नेह सब सूं लगायो है।

पर उपकार कर्‌यां पुण्य ही मिलैगो सदा, भासा रै भरोसै

म्हे तो अपणोंपन पायो है।

शिव तो सदा ही शिव महिमा महेश महा

काशी कैलाश होय, अरथूणों थांवळौ।

मन सूं मिलै सो मीत, गुण सूं गुणीजै गीत

प्यार सूं पळीजै प्रीत, गोरो हो या सांवळौ॥

साधू संत शास्त्र सब, सारभूत बात इक

पूजीजै परोपकारी जत्ती हुय वा जांगळौ॥

विकलांग विज्ञ जद संवेदनशील होय

सगळा सरावै बण नै, प्रबला हो या पांगळो।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शिवदयाल पारीक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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