हणियो थे हिरणाकसप, अधर, महल रै बार।
पत रखण पहलाद विसन! बणियो नरहरि बाप॥
विष रो कीधो थे अविष, साप सालीगराम।
निरख भगति मीरा विसन! रुदे समाई बाप॥
भील जात री भीलणी, नाम भगति मतवाळ।
छूत अछूत न गिण विसन! बौर अरोगै बाप॥
साप लगियो बणी सिला, अहल्या हलि न आप।
चरण-रज तुहाळी विसन! बैठी हुयगी बाप॥
सुरुचि न दीधो बेसण, गोद ध्रुव भूपाळ।
वन तपियो ऊभो विसन! पद ध्रुव दीधु बाप॥
भिक्षाटन परवार भरण, झूंपी रो रहठाण।
नेह मिंत राख्यो विसन! दाम सुदामा बाप॥
बणिया ठीगू भगत मिस, पूगा बलि दरबार।
विराट सूं वामन विसन! भरिया डग त्रि बाप॥
जावत लाज भगत जोय, कौरवां दरबार।
वार खिणरी नी कीं विसन! चीर बधायो बाप॥
सीत पुकार गीध सुणीं, रण में आयो काम।
दीधु हाथां दाग विसन! भगत बछल थे बाप॥
वार-वधु री जीवनी, कीर भणावै राम।
परतख नै अपरतख विसन! गणिका तारी बाप॥
पतित अजामिल पापियो, जोय खड़ा जमराज।
नारायण पुकार विसन! धाय नाराण बाप॥
गज-ग्राह जुध हुयो गजब, जोर कीन गजराज।
थाक पुकार सुणी विसन! ग्राह विदारै बाप॥
रूं-रूं राम वास करै, नी खिण छंडै नाम।
दरसावै हनमत विसन! छाती चीरी बाप॥
भारत भीषण जुद्ध में, भीष्म मचावै राड़।
पत राखण भगतां विसन! धाय चक्र ले बाप॥
ममता उपड़ी विजय मन, जोय शत्रु रणवाट।
गीता उदबोधे विसन! धनख उठायो बाप॥
भोळी करमां रोज हरि, खींच धरावै आप।
अेक दिन साचांणी विसन! आय अरोगै बाप॥
कृत्या दुरवासा कुपित, छंडी भगत अकाज।
शरणां अम्बरीष विसन! लार चक्र तव आप॥
राधे-गोविन्द दिवस निस, नरसी अवर न काम।
सीकारी हुंडी विसन! भात भरियो बाप॥
शिवि नरेश जग अति विरल, दीधो सरवस आप।
तुला बैठो आप विसन! बणियो कपोत बाप॥
झंपळायो जीवन समद, ले नै थांरो नाम।
तारण हारो थूं विसन! भाटा तरिया बाप॥