सगळै सहरां मांय

एक है कागलां री भासा

बिना पंखेरू हुयां

समझो इण नै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : हेमन्त शेष ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 23
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