गरमी रै म्हींना में दिनूगे

आथूणी पून

ठंडी घणी लखावै,

होळां-होळां दोपारी में

बण लूआं रो रूप

घणी जोर धंधावै।

भांत्यां ही मिनख ओगणों

मीठी-मीठी बात बणकै

नेड़ै-नेड़ै आवै,

मतलब काडै, काम बणावै

अर

पाछै आंख दिखावै

बो बैरी बण जावै।

स्रोत
  • पोथी : हिवड़ै रो उजास ,
  • सिरजक : रामनिरंजन शर्मा ‘ठिमाऊ’ ,
  • संपादक : श्रीलाल नथमल जोशी ,
  • प्रकाशक : शिक्षा विभाग राजस्थान के लिए उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
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