धरणी
बीज ले’र बैठी छै
हाल बी
आपणी कोख मं
बखतसर तड़कैगो
माटी को पापड़ो।
धांस को झंडो ले’र
खडैगो बीज
बाळ पाणी अर तपन सूं
बदैगो आपू-आप
जस्यो बायो उस्यो।