बेरंगा हुयग्या बापू रा आखर
मांदी पड़गी सुरसत री वाणी
तीखापण रीती सोचण धारा
मानता रो हुयग्यो बोदो पाणी
स्वारथ रै रेलै में, कारज बै ग्यो
बापू रो बस, नांव ईज रै ग्यो।
फूट्या सपनां रा उजळा मोती
बिसरी रचणो मिनखाणी सिणगार
टूटी अेकै री जबरी कड़ियां
गटक्यो काळख ग्यान जोत उजियार
दीसै कोरो वाद, गांधी खै गयो
बापू रो बस नांव ईज रै गयो।
हुयगी अनाथ बड़भागण सांति
स्वारथ पाप बण्या जग सिरताज
प्यार मुहताज हिंसा रै गळ हार
धरम अभिसाप तण्यो जुध साज
भूल्या वो संदेश जो बापू दे गयो
बापू रो बस, नांव ईज रै गयो।