बेटी रै ब्याव में

आप पधार्या

कड़ूम्बै सैती...

मन्नै घणो हरख हुयौ।

थानै देख’र

म्हारी छाती हुयगी चौड़ी

अर पुराणी यादां हुयगी हरी!

म्हूं देख्यो-

थारो प्रेम पोळमपोळ हो

म्हूं भीतर तांईं भरग्यो।

जदी म्हूं थानै

बांथां में भर लिया,

पण नीं कह सक्यो थानै

आपरै मन री मांयली बात।

म्हूं दु:ख-सुख बांटणो चावै हो

पण टैम थानै नीं हो

अर टैम म्हानै ई..!

स्रोत
  • सिरजक : दीनदयाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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