आयो पेलो तीज तुंआर चढ्यो जोबनिया रो भार

मीठी कुण करै मनवार, उबी सज सोळा सणगार

कागा रे! सूनी-सूनी लागै गैल, सूनो-सूनो लागै आंगणियो।

कोयल रा लागै कड़वा बोल भावै नी साथण रो बोलणो

कींकर केऊं मनड़ा री बात ऊंडो ज्यूं अरथ-खोलणो

काजळ खुट-खुट नीरेण-नेण बरस ज्यूं आयो सावणियो

कळियां री आंख तळांयां भंवरा मन कींकर भावै

बिन पाणी नीर बावळा देख अठै कींकर कुरळावै

थां बिन सगळा सूना-सूना लागै गीत सूनो लागै गावणियो।

बिलमायो बालम बादीला मौज तो पावणी दन चार है

मूंगै बणज बिणजारा सूंगो सदाई थारै लार है

ढोला आवतो ढोल्यो ढाळूं रे बांटू घर-घर लावणियो।

आंज्योड़ी आंख्या में मन अब अंधारो लखाय रे

सगार्‌यो सणगार मन जाण रोम-रोम सूं खाय रे

सालै नणदल रा बोल बेठी रे कुण बेठो मनावणियो॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : वंशीलाल 'पारस' ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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