आजादी री सौन जयंती देखो देस मनावे रे

मामां रो ब्याव मां पुरसारी चौपड़-चौपड़ खावै रे।

टेम आयगी अतरी माड़ी बाड़ खेत खावण लागी

घर री इज्जत दिन दौफारां बेरा में पड़बा भागी

अबलावां री अस्मत जाणै हाट वाळो रामतियो होगो

पूत पांखियां बारै आतां मायड़ डाकण बण खागी

चोर हाथ में लियां हथकड़ी चोर पकड़बा जावे रे।

चूंट-चूंट नै देस खायग्यो देसी खादी को जाळो

गायां को चारो नीं छोड्यो और करास्यो के टाळो

संसद री सगलळी गळियां में अै लुटेरा भरिया पड़िया

भाषण धोळा धप्प कागद्‌यो कांईं होवै है काळो

सौ-सौ ऊंदर खाय मिनकड़ी माड्या ही कुरलावे रे।

झबरां-झबरां रोय रिया सुरगां में बोस भगत गांधी

पाछो आणो हाथ रियो नीं, नीं आणां में सार अब्बै

प्रळय तांई त्यार कुदरत खड़ी दिखै कमर्‌यां बांधी

मसळै बैठा हाथ, अठै तो पांचूं घी में जावै रे।

तेरहा-तेरहा डाकू दळ मिल घेरो सत्ता में मांड्यो

डांग फाड़र्‌यो चवड़ै-धाड़ै लांठाई को डांड्यो

सोनो सगळो गियो विदेशां मौज करो भारत वास्यां

कियां चालसी गाडूली बळद्‌यो जोत लियो बांड्यो

आंधा पीसै खाय गंडकड़ा कुण गायड़ धमकावे रे।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : पवन पहाड़िया ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन, पिलानी ,
  • संस्करण : अंक-19
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